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मंगलवार, 12 मई 2020

लाॅकडाउन में क्या करें?





कोरोना वायरस के कारण लंबे समय तक चलने वाले लॉक डाउन ने हमें ना चाहते हुए भी घरों में रहने के लिए विवश कियाप है ।मेरे विचारों में कार्यों की कुछ ऐसी सूची है जिसे समय की कमी या व्यस्तता उनको करने में बाधक बनती रही है। आज सबसे सही समय है कि हम उसमें से एक या दो चुनकर उसे अपने जीवन में उसे उतारे। हममें से कई ऐसे लोग हैं जो ऐसा कर भी रहे हैं।

1.घर को चलाने वाले सभी सहायक हाथ मजबूरीवश अपने घरों में कैद है। ऐसे समय में दैनिक दिनचर्या में सभी सदस्यों की समान भागीदारी रखने से कार्य शीघ्रता से निपट जाएगा और घर के सभी सदस्यों क्वॉलिटी  टाइम साथ में  बिता पाएंगे ।साथ ही हम अपने कैद सहायक हाथों को जिंदा रखने के लिए उनकी तनखा भी सहजता व उदारता के साथ दे पाएंगे।

2. अपने किसी कलात्मक अभिवृत्ति या रुचि को निखारने के लिए भी यह उत्तम समय है-  जैसे पेंटिंग, गायन ,वादन ,बागवानी । हम इनका संग्रह भी तैयार कर सकते हैं। जो सुखद स्मृति के रूप में सदैव हमारे  साथ जुड़कर रहेगा ।

3.परिवार के साथ क्वॉलिटी टाइम बिताने के लिए  एकसाथ व्यायाम करना,कुछ खेल खेलना जैसे- लूडो ,सांप -सीढ़ी,  आइस -पाइस ,आँखों पर पट्टी बांधकर छूना ,पीठ पर घोड़े की सवारी, तकिए से चुहल बाजी। कुछ समय के लिए हमें मोबाइल से दूर भी रखेगा और परिवार के हर सदस्य का स्पर्श,  उनसे नजरें मिलाना ,साथ मिलकर ठहाके  लगाना हमें जीवंत भी रखेगा ।

4.इस समय परिवार के साथ मिल बैठने छोटे बड़े हर किसी के अनुभव जीवन प्रसंगों को सुनने से एक दूसरे के प्रति संवेदनशीलता बढ़ेगी व रिश्ते और अधिक मजबूत होंगे।  सभी को पारिवारिक यादों को बांटना व संजोना अच्छा लगेगा ।

5.यह समय मातृभाषा के परवरिश का काल भी बन सकता  है।अपनी मातृभाषा में  मनपसंद पुस्तक पढ़ना  ,फिल्म देखना इसी में बात करने से भाषा पर पकड़ अच्छी बनेगी। जो आत्मीयता का सृजन  करेगी।

6.डायरी के पन्नों में प्रकृति परिवर्तन, पारिवारिक संबंध विशिष्ट वर्ग की कर्मठता जैसे विषयों को स्थान  देना जो भविष्य में मानवता के प्रति हमारे विश्वास को जगाए रखेगी।

7. पुराना संकलन देखना जैसे एल्बम, टिकट संग्रह ,पुराने पत्रों के बंडल पढ़ना अतीत को ताजा कर देगा ।

8.आज मीडिया  के दौर में हम आन-लाइन आकर कुछ  समय के अपने एकल परिवारों को संयुक्त बना सकते हैं ।

9.मानवीय मूल्यों को जीवित रखते  हुए हम गुप्तदान ,  श्रमदान करके राष्ट्र संबल भी बन सकते हैं ।

जो आज वर्तमान है कल अतीत के रुप में  हमारे जीवन पृष्ठों में जुड़ जाएगा ।अपने इस पन्ने को यदि बोरियत काल के अपेक्षा रचनात्मक काल में तब्दील कर सकें तो हमारी जीत होगी।


 मेरे दिमाग में जो कार्यों की सूची थी वह मैंने आपके साथ बाँटी है। यदि आपके पास भी ऐसे सुझाव हैं तो नीचे कमेंट बॉक्स में जोड़ते जाइए। क्या पता आपका एक सुझाव किसी के अतीत की पुस्तक  में एक सुनहरा पन्ना  और जोड़ दे।
# घर पर रहें ।
आप सुरक्षित,देश सुरक्षित ।

पल्लवी गोयल 🙏
चित्र गूगल से साभार 

शनिवार, 7 जुलाई 2018

ऐ सुल्लो! पानी ले अइलू का..






सुल्लो आज भी मन मसोसकर ही रह गई पिछले कई दिनों से मां से मिलने जाना चाहती थी अभी दो दिन पहले जब राजू चाचा आए थे मिलते हुए बताते गए थे कि मां की तबीयत बहुत खराब है ।आज किसी भी काम में उसका दिल नहीं लग रहा था। इस पानी की किल्लत ने जीना हराम कर रखा था। घर से पाँच किलोमीटर दूर एक सरकारी नल था जिसमें पतली  धार से  पाँच घंटे पानी आता था गांव की औरतों का सबसे पहला काम था अंधेरे में उठते ही पानी की लाइन में लग जाना ।जो उठा-पटक होती थी घर आते आते ही नौ बज जाते थे घर आते ही घर गृहस्थी में तीन कब बज जाते उसे पता ही न लगता आज माँ के यहां जाने का निश्चय करके उसने सवेरे  साढ़े तीन बजे ही पानी की लाइन में लगने का निश्चय किया ।जब वह घर छोड़कर निकली तो चाॅद चमक रहा था ।रह-रहकर कुत्तों के भौंकने की आवाज आ रही थी। आंचल समेटते ,पैर दबाते   हुए  वह नल  तक पहुंच ही गई ।कुछ ही दूर देशी शराब खाना था जहां दो चार  शराबी लुढ़के पड़े  थे ।उनके खर्राटों की आवाज के साथ जब भी तेज बड़बड़ाने  की आवाज आती वह सहमकर सिहर उठती ।साढ़े चार  बजा था और गाँव की कोई भी औरत वहां नहीं आई आई थी। वह नल के सामने पहले स्थान पर खड़ी हो गई ।अभी छःबजे पानी आ जाएगा और सात बजे तक घर का सारा काम निपटा कर दस बजे मां के गाँव के लिए निकल जाएगी। अपनी सोच में वह इतना डूब गई थी उसे नज़र ही नहीं आया कि कोई उसके नजदीक आकर अपनी लाल -लाल आंखों से उसे घूर रहा है।   यह गाँव का आवारा और शराबी  राजा था। बहुत  बदनाम था। वह उसके पास आकर हँसा  और बोला "का भउजी आज पहलहिन लाइन में लग गइलू ..पहिलका  नंबर ...हाँ...." यह कहकर हँसते हुए उसने सुल्लो की तरफ हाथ बढ़ाया ।उसका हाथ के रूप में बढ़ते केेेंचुुए को देखकर घृणा का ज्वार सा उठा वह उसे छू  पाता  उससे पहले  ही उसने उसे ज़ोर से धक्का दिया और उसके चंगुल से भाग निकली ।पीछे मुड़कर  भी नहीं देखा ।घर आई तो सास बिस्तर से आवाज़  लगा रही थी " ऐ सुल्लो! पानी ले अइलू  का " सुल्लो  मुंह से बोल नहीं फूटे वह बिस्तर की चादर में मुँह  डाले सुबकती रही ।
                                                      
चित्र साभार गूगल                                                                                                                                         @पल्लवी गोयल